
जिसमें भाई भाई को मारता है ।
जो धर्म के नाम पर दुश्मनी पालता है,
वह भगवान को अर्ध्य से वंचित करता है ।
जिस अंधेरे में भाई भाई को नहीं देख सकता ,
उस अंधेरे का अंधा तो स्वयं अपने को नहीं देखता ।
जिस उजाले में भाई भाई को देख सकता है,
उसमें ही ईश्वर का हँसता हुआ
चेहरा दिखाई पड़ सकता है ।
जब भाई के प्रेम में दिल भीग जाता है ,
तब अपने आप ईश्वर को
प्रणाम करने के लिए हाथ जुड़ जाते हैं ।
- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
मूल बांग्ला से अनुवाद :
मोहनदास करमचंद गांधी
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